Wednesday, 20 February 2013

काश कि

(1)

काश कि
'अपरिमित'
आकांक्षाओं का आकाश,
डूबते तारों के साथ ही डूब जाता,
'असीमित'
दर्द का सागर,
सूख जाता,
सूर्य की किरण से मिलते ही,
हर दिन मेरा टूटना,
टूट कर बिखरना,
होम हो जाना,
बन जाता इतिहास,
हर नई सुबह के साथ ही .. !!अनु!!

(2)

टूटता मन,
ढूंढता है तुम्हे,
दर ब दर,
चाँद खफा खफा सा,
तारे भी नाराज हैं,
कोई तूफ़ान,
कोई सैलाब,
रोक नहीं पाता,
तुम्हारी यादों का साया,
छा जाता है,
अनंत आकाश के विस्तार तक .. !!अनु!!



(3) 

यूँ तेरा दामन झटक कर,
नजरे चुरा कर निकल जाना,
मेरी हर बात पर ,
मुस्कुरा कर निकल जाना,
गंवारा नहीं मुझे,
सब भुलाना
मुझे रुलाना और
दिल जला कर निकल जाना .. !!अनु!!



(4) 

मोहब्बत की राह में
ख़लिश ही मिलनी थी,
इसलिए, 
दरमयां फासला रखा .. !!अनु !!

(5) 

नहीं मिलता,
कोई अक्षर,
कोई शब्द,
जो बाँध सके 'तुम्हे',
मेरी कविता में ....!!ANU!!

Tuesday, 19 February 2013

कुछ मन की

            

(1)

लाख नफरतें पालो, प्यार कम नहीं होता,

'ख़ुशी' ख़ुशी न देती, अगर गम नहीं होता,

टीस तेरे जाने की दिल से नहीं जाएगी,

वक़्त हर इक जख्म का, मरहम नहीं होता !!


(2)

यक़ीनन, तू रहता है मेरे दिल में , अब भी कहीं न कहीं,

बेसबब, तेरे जिक्र से दर्द-ए दिल नहीं होता .. !!अनु!!


(3)

मेरी मसरूफियत मुझे, रूबरू होने नहीं देतीं,

तुम्हे मिल कर तुमसे गुफ्तगू होने नहीं देतीं,

बिखर कर फिजाओं में, महका तो दूँ चमन तेरा,

ज़माने की रवायतें मुझे, खुशबु होने नहीं देतीं ..!!अनु !!

Wednesday, 13 February 2013

सरस्वती पूजा

कल सरस्वती पूजा है, लेकिन यहाँ स्कूल से ले कर गलियों तक कहीं भी इसकी धूम नहीं है, और मेरी रांची में, वहां तो जगह जगह सरस्वती माता का पंडाल लगा होगा, ठीक मेरे घर में सामने भी, कभी भक्ति तो कभी आदवासी गाने ज्यादा बजते हैं। जब स्कूल में थे, तो मुझे याद है, 8 क्लास से ही हम लोग पूजा वाले दिन साड़ी पहनने लगे थे, बकायदा साड़ी पहनकर, उस दिन स्कूल जाते थे, और पूजा के बाद होती थी खूब मस्ती, फिर किसी दोस्त के घर जाने का प्लान, मतलब की पूरा दिन बस घूमना और खाना मैं, अंजना और पिंकी ..उन दोनों का घर एक रूट में पड़ता था, इसलिए करीब हर साल इन्ही दोनों के घर जाया करते थे हम .. खैर, अब कहाँ वो मस्ती भरे दिन, वो सखियों का साथ, बस  कुछ यादें हैं, जिन्हें संजो कर रखा है .. हमेशा के लिए .. 

Saturday, 2 February 2013

इंतज़ार

जाने क्यूँ,
रूठती रही जिंदगी,
रूठता रहा प्यार,
और नसीब ने लिख दिया,
फ़कत इन्तेजार,
इंतज़ार ख़त्म नहीं होता,
बंद हो जाती हैं आँखें,
ये प्यार ख़त्म नहीं होता,
ख़त्म हो जाती हैं साँसे... !!अनु!!

Tuesday, 29 January 2013

मैं कविता में,


मैं कविता में,
प्यार नहीं लिखती, 
नफरत लिखती हूँ,
मिलन नहीं लिखती 
बिछोह लिखती हूँ, 
ख़ुशी नहीं लिखती, 
वेदना लिखती हूँ, 
ऊँचाइयाँ नहीं लिखती, 
गहराइयाँ लिखती हूँ,
मुझे प्यार है, 
डूबते सूरज से, 
गहराती रात से, 
दर्द में डूबे साज से ..!!अनु !!

Monday, 21 January 2013

!!अनु!!


यूँ मशरूफियत का किया बहाना मैंने,
खुदी से खुद को किया बेगाना मैंने,
तेरी  हर नजर दिल के पार जाती है,
परवाने सा किया खुद को दीवाना मैंने ... !!अनु!!



चलो, जिंदगी को यूँ जिया जाये,
हरेक ख्वाब को मुकम्मल किया जाये,
दिल तेरे दर्द से आबाद रहा है अक्सर,
कुछ देर को इसे घर छोड़ दिया जाये .. !!अनु!!


'जिंदगी'


         (1)
किसी टूटते दरख़्त को
देखा है कभी,
सुनी है, उसकी चीत्कार,
ऐसे ही चीत्कार उठता है
मेरा मन भी,
जब
रौंदते हो 'तुम'
मेरी 'आत्मा' ,
कुचल देते हो
मेरे 'सपने'
दर्द को होठों में भींच,
समेट  लेती हूँ,
पलकों में आंसू सारे,
सजा लेती हूँ,
मुस्कान 'होठों पर' ,
तुम्हे नफरत जो है,
मेरे उदास चेहरे और
गालों पर लुढ़कते आंसुओं से .. !!अनु!!

     (2)

'जिंदगी'
इम्तिहान लेती है,
फिर मिलता है,
परिणाम,
 'मैं'
बगैर परिणाम की सोचे,
देती हूँ इम्तिहान,
'हर बार'
खबर है मुझे,
उसने मेरी तकदीर में,
हार और वेदना लिखी है,
अरमानों की राख लिखी है,
आशाओं की लाश लिखी है .. !!अनु!!

साथ

उन दिनों जब सबसे ज्यादा जरूरत थी मुझे तुम्हारी तुमने ये कहते हुए हाथ छोड़ दिया कि तुम एक कुशल तैराक हो डूबना तुम्हारी फितरत में नहीं, का...