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Thursday, 13 September 2012

स्त्री देह

'देह'
स्त्री की,
जैसे हो, कोई खिलौना,
पता नहीं, 'कब' 'किसका'
मन मचल पड़े,
'माँ' 'माँ' यही खिलौना चाहिए मुझे,
मेरे मन को भा गया।.

तो क्या हुआ ?
गर, किसी और का है,
मुझे खेलना ही तो है,
नहीं चाहिए,
मुझे कोई दूसरा खिलौना,
'यही चाहिए, तो यही चाहिए' ...

एक दिन मिलता है, वही खिलौना,
रौंदा हुआ, टुटा हुआ,
लोग अनजान, 'कब हुआ' किसने किया'?
हजारों हाथ आगे बढे, लाखो आवाज़ गूंज उठे,

'तुम कदम उठाओ, हम तुम्हारे साथ हैं,
तुम्हारी इक आवाज़ में, हमारी भी आवाज़ है'

पर उन हजारों हाथों में,
कोई एक भी हाथ नहीं था, 
'उसके सिन्दूर का'
कोई एक भी आवाज़ नहीं थी,
उसके प्यार की,
कोई एक भी कदम नहीं था,
उसके साथ चलने के लिए,
'जीवनभर'

(यही है ....इस समाज का सच, बलात्कार से पीड़ित स्त्री से सहानुभूति तो सब रखते हैं, लेकिन उसका हाथ थामने, कोई आगे नहीं आता)


14 comments:

  1. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

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    1. bahut bahut aabhar aapka.. ji.. jarur

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  2. Bahut ache se pradarshit kiya hai aapne is situation ko... hum sab ko apni soch sudharne ki jarurat hai... ek ya do ko nahi hum sab ko samjhna hoga... aap ne abhut achi shuruwat ki hai, HATS OFF

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    1. Thanks Pankaj ji.. main pehle bhi is topic pr 2 kavitayein likh chuki hu..

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  3. बहुत सुंदर लिखा है ...कड़वा सच है ....

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  4. koshish choti mager tuchi mun ko choone vali,thode bahut kduva sach kah gai aap, anitaji,{geeta purohit}

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  5. आप हमेशा अच्छा कहती हैं , ओंर खूब कहती हैं , नारी का दुःख खुद नारी से बेहतर ओंर कोंन जानता है ,, अपने कई रूप में जीवन को जीने वाली ...... जब अपनी कविताओ; में वो एहसास भर्ती है तो सच पूरी तरह निखर कर खुल कर सामने आता है ... ओंर सुन्दर रचनाओं को जन्म देता है .. मुझे आप से बहोत सारी उमीदें हैं ... आप कोशिश जरी रखिये ..ओंर लिखने के साथ पढ़िए भी खूब पढ़िए .... सोना आग में तप कर कुंदन होता है


    दिलशाद नजमी

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  6. आप हमेशा अच्छा कहती हैं , ओंर खूब कहती हैं , नारी का दुःख खुद नारी से बेहतर ओंर कोंन जानता है ,, अपने कई रूप में जीवन को जीने वाली ...... जब अपनी कविताओ; में वो एहसास भर्ती है तो सच पूरी तरह निखर कर खुल कर सामने आता है ... ओंर सुन्दर रचनाओं को जन्म देता है .. मुझे आप से बहोत सारी उमीदें हैं ... आप कोशिश जरी रखिये ..ओंर लिखने के साथ पढ़िए भी खूब पढ़िए .... सोना आग में तप कर कुंदन होता है


    दिलशाद नजमी

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  7. सच कहा है आपने ... उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति ।

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