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Saturday, 1 September 2012

बीते हुए दिन

तारीखें बदलती रहीं,
दिन, महीने, साल, बीतते रहे,
पर तुम
'कभी नहीं बन पाए'
'मेरे बीते हुए दिन',
हमेशा की तरह, आज भी
हाथों में हैं,
तुम्हारा हाथ,
आज भी ताज़ा है,
माथे पर अंकित तुम्हारा प्यार,

ऋतुएँ, आती जाती रहीं,
परन्तु,
मेरे मन का ऋतु तटस्थ ही रहा,
बिना कोई बदलाव लिए,
उम्र के इस मोड़ पर
जब इंसान सपने देखना बंद कर देता है,
मेरी पलकों में,
ख्वाब के सितारे, टिमटिमाते रहते हैं,
उम्मीद की उर्जा के साथ,

'तुम'
हमेशा  ही मेरा आज ही रहे'
"बीता हुआ कल भी नहीं, आने वाला पल भी नहीं'...

7 comments:

  1. Hatho main hai hath tumhara, aaj bhi taja hai mathe par ankit pyar tumhara....
    Really.....my heart go with this lines.. mathe par hai ankit pyar tumhara..

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  2. Bahut bahut aabhar Pankaj ji .. nd Mahendra ji..

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  3. बहुत सुंदर रचना बधाई आपको अनीता ---

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  4. मन को अंदर तक छू लिया ....बहुत सुंदर लिखा है अनीता जी

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  5. sac_che man ki ach_chi batein
    koi aap se seekhe .....khoob bahot khoob .

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