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Monday, 8 April 2013

'वो'

'वो' 
उसका आखिरी गीत था, 
कल से उसे 
अपने पंखों को विराम देना था, 
अपने सपनो की 
रफ़्तार रोकनी थी, 
'शायद' 
तैयार नहीं थी 'वो' 
उसके लिए, 
'गीत' 
तो उसकी रूह में बसते थे, 
थरथराते होठों,
पनीली आँखों
और रुंधे गले से गाये गीत
वो छाप न छोड़ सके
जो अमूनन उसके गीत छोड़ते थे,
वो गाती जा रही थी,
अपनी ही रौ में,
'बेपरवाह'
उसे पता ही नहीं चला,
'कब'
उसके गीतों का दर्द
उसकी आँखों में उतर आया,
तेजी से आंसुओं को
पलकों में भींच लिया उसने
और होठों पर सजा ली,
एक प्यारी सी मुस्कान ..
मगर,
बेहिसाब कोशिशों के बाद भी,
उसके अश्क पलकों पर ठहर न सके,
छलक ही पड़े,
उसकी आवाज़ गले में ही
घुट कर रह गयी,
'और' वो गीत सचमुच बन गया
उसके जीवन का 'आखिरी गीत' !!ANU!! ....

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