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Tuesday, 16 April 2013

'उसने'





'उसने',
जिंदगी के रेत से,
एक सपना गढ़ा,
उसे आकार दिया,
सजाया,
जब वो सपना
परिपक्व होने को आया,
तो 'अचानक'
वक़्त की आंधी आई
और उड़ा ले गयी ,
उसके सपने ..
और छोड़ गयी
उसकी आँखों में,
फ़कत 'आँसू ' ... !!अनु!!

3 comments:

  1. खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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  2. वक्क ऐसे ही सतम करता है ... अक्सर ...

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