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Sunday, 14 April 2013

मुक्तक


दिल के किसी कोने में, वो प्यार आज भी है,
सावन की बूंदों में, वही खुमार आज भी है,
'बेशक' जिंदगी तेरे साथ की मुहताज नहीं,
'पर दिल' तेरे एहसासों का तलबगार आज भी है ... !!अनु!!


उठती हर मौज का, साहिल नहीं होता, 
आँखों से क़त्ल करनें वाला, कातिल नहीं होता, 
यक़ीनन, तू रहता है अब भी, दिल में कहीं न कहीं, 
बेवजह तेरे जिक्र से दर्द - ए - दिल नहीं होता !!अनु!!

2 comments:

  1. बहुत खूब ... उनके तलबगार आज भी हैं ...

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