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Sunday, 11 September 2011

Khusiyan

जाने क्या बात है, खुशियाँ रास नहीं आती,
दूर रहती है हंसी, आस पास नहीं आती...

वो जो पलकों पर, बिठाये रखते थे मुझे,
अब उनको मेरी, याद नहीं आती....

चाहे कितना भी कठिन हो, जीवन का सफ़र,
बुलाने से मगर, मौत नहीं आती..

यूँ तो गम मिलते हैं, कदम कदम पर यहाँ,
खुशियों की ही कोई, सौगात नहीं आती.... !!अनु!!

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