Friday, 28 June 2013

'प्रेम'

'प्रेम'
आज कल
रातें भीगी सी हैं ,
और 'दिन' भी
भीगा भीगा सा,
तुम्हारी यादों की सीलन,
मन के कोने कोने में,
महक रही है..
एक छोटी सी ख्वाइश,
अबके सावन,
तुम भी बरसो .. 



Thursday, 6 June 2013

अहसास



1)

'वो '
जानती थी,
'वक़्त' अपने घर लौट कर नहीं आता,
'उस' मोहिनी सी सूरत को,
अपनी आँखों में भर लेना चाहती थी वो,
उसे पता था,
'बेशक' वापसी के 'वादे हजार' थे,
'लेकिन' कोई रास्ता न था ...
चाहे, अनचाहे ,
'वो'
रोज ही दर्द बन कर,
उसकी आँखों से छलक पड़ता था,
उसका लौट जाना,
कभी मंजूर नहीं किया उसने,
जाने कितनी ही रातें
गुजारती रही वो,
उसकी हथेली की छुअन
अपनी हथेली पर महसूस करते,
अपनी बंद पलकों में
उसके सपने बुनते ...

2)

आपने जो रखा, जिंदगी में कदम,
दिल की बगिया के सारे, सुमन खिल गए,
मेरी अधरों ने फिर, रचे गीत जो,
चाँद तारे भी सुनकर, उसे जल गए ..... !!अनु!!




Wednesday, 1 May 2013

तुम आओ तो आ जाती है, 
                           पतझड़ में भी बहार प्रिय,
प्रीत के रंग बिखरा जाती है, 
                           मेघों की ये फुहार प्रिय।नैनों में स्वप्न, कानों में मिश्री, 
                           साँसों में संदल घोल गए, 
अधमुंदी मेरी पलकों पर, 

                           जब तुमने टंका था प्यार प्रिय .

Sunday, 28 April 2013

गीत

जब भी गाया, तुमको गाया, तुम बिन मेरे गीत अधूरे,
तुमको ही बस ढूंढ़ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे ...


तुम पर ही थी लिखी कविता, तुम पर ही थे छंद लिखे,
तेरे किस्से, तेरी बातें, तेरी सुधियों के गंध लिखे ..

तुमको ही अपने जीवन के, नस नस में बहता ज्वार कहा,
मेरे मन की सीपी में, तुम ही थे पहला प्यार कहा ,

एकाकी मन के आँगन में, बरसो बन कर मेघ घनेरे ...
तुमको ही बस ढूंढ़ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे ... 


तुम इन्ही पुरानी राहों के, राही हो कैसे भूल गए,
आँखों से आँखों में गढ़ना, सपन सुहाने भूल गए ...

वो पल जो तुम संग बीत गए, वो पल मेरे मधुमास प्रिय,
ये पल जो तुम बिन बीत रहे, ये पल मेरे वनवास प्रिय ..


मैं मीरा सी प्रेम दीवानी, तुम हृदय बसे घनश्याम मेरे,
तुमको ही बस ढूंढ़ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे ... 

Tuesday, 23 April 2013

नदिया



सुनो, सुनाऊं, तुमको मैं इक, मोहक प्रेम कहानी, 

सागर से मिलने की खातिर, नदिया हुई दीवानी ...


कल कल करती, जरा न डरती, झटपट दौड़ी जाती, 

कितने ही अरमान लिए वो, सरपट दौड़ी जाती, 
नई डगर है, नया सफ़र है, फिर भी चल पड़ी है, 
तटबंधों को साथ लिए वो धुन में निकल पड़ी है, 
पर्वत ने पथ रोका  लेकिन  , उसने हार न मानी।। 
सागर से मिलने ...... 

मटक मटक कर, लचक लचक कर, इठलाती, बलखाती, 

बहती जाये नदिया रानी, गाती गुनगुनाती, 
हवा ने रोका,  गगन ने टोका, क्यूँ  तुम  जिद पे  अड़ी हो, 
सागर से मिलने की धुन में, हमको भूल चली हो, 
बात न उसने मानी किसी की, करनी थी मनमानी ... 
 सागर से मिलने ......

सागर की लहरों ने पूछा, हम से क्या पाओगी, 
मिट जायेगा नाम तुम्हारा, खारी हो जाओगी,
नदिया बोली तुम क्या जानो, प्रेम लगन क्या होती है, 
खुद को खो कर प्रिय को पाना, अन्तिम मंजिल होती है।। 
जरा न बदली चाल नदी की, बदली नहीं रवानी .... 
सागर से मिलने .........


लहरों ने दिवार बनाई, नदिया के रुक जाने को, 

नदिया ने भी जोर लगाया, सागर से मिल जाने को, 
जाकर नदी मिली सागर से, झूम उठा जग सारा, 
जैसे कान्हा की बंशी सुन, नाच उठे ब्रजबाला, 
रस्ता रोक नहीं पायीं, जो लहरें थीं तूफानी। ..
सागर से मिलने ...... 

Tuesday, 16 April 2013

'उसने'





'उसने',
जिंदगी के रेत से,
एक सपना गढ़ा,
उसे आकार दिया,
सजाया,
जब वो सपना
परिपक्व होने को आया,
तो 'अचानक'
वक़्त की आंधी आई
और उड़ा ले गयी ,
उसके सपने ..
और छोड़ गयी
उसकी आँखों में,
फ़कत 'आँसू ' ... !!अनु!!

ग़ज़ल


चेहरा जब आंसूओं से तरबतर होगा,
झील सी आँखों में तब दर्द का बसर होगा ..

नजरें दूर तलक जाके लौट आयेंगी,
धुंध का जिंदगी में जब भी असर होगा ,

जब उठाओगे तलवार बेवफाई की,
सामने देखना मेरा ही झुका सर  होगा,

हर घूँट तेरे नाम का है मंजूर मुझे,
अमृत होगा वो या के जहर होगा,

दर्द के मेले में भी हंसती हो ख़ुशी,
ऐसा कोई तो इस जहान में शहर होगा,

गर लौट भी आये तो क्या होगा 'अनु',
अब  सिन्दूर वो किसी और ही के सर होगा  .. !!अनु!!

साथ

उन दिनों जब सबसे ज्यादा जरूरत थी मुझे तुम्हारी तुमने ये कहते हुए हाथ छोड़ दिया कि तुम एक कुशल तैराक हो डूबना तुम्हारी फितरत में नहीं, का...