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Friday, 28 June 2013

'प्रेम'

'प्रेम'
आज कल
रातें भीगी सी हैं ,
और 'दिन' भी
भीगा भीगा सा,
तुम्हारी यादों की सीलन,
मन के कोने कोने में,
महक रही है..
एक छोटी सी ख्वाइश,
अबके सावन,
तुम भी बरसो .. 



3 comments:

  1. क्या बात है ... थुम भी बरसो और सीलन बन के कमरे में उतरो ...

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