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Thursday, 6 June 2013

अहसास



1)

'वो '
जानती थी,
'वक़्त' अपने घर लौट कर नहीं आता,
'उस' मोहिनी सी सूरत को,
अपनी आँखों में भर लेना चाहती थी वो,
उसे पता था,
'बेशक' वापसी के 'वादे हजार' थे,
'लेकिन' कोई रास्ता न था ...
चाहे, अनचाहे ,
'वो'
रोज ही दर्द बन कर,
उसकी आँखों से छलक पड़ता था,
उसका लौट जाना,
कभी मंजूर नहीं किया उसने,
जाने कितनी ही रातें
गुजारती रही वो,
उसकी हथेली की छुअन
अपनी हथेली पर महसूस करते,
अपनी बंद पलकों में
उसके सपने बुनते ...

2)

आपने जो रखा, जिंदगी में कदम,
दिल की बगिया के सारे, सुमन खिल गए,
मेरी अधरों ने फिर, रचे गीत जो,
चाँद तारे भी सुनकर, उसे जल गए ..... !!अनु!!




2 comments:

  1. अलग अलग मूड को बाखूबी शब्दों का जामा पहनाया है ...

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