Monday, 19 January 2015

****ग़ज़ल***


मेरे दिल की किताब हो जाना,
सारे खत का जवाब हो जाना,
मन का मौसम मेरा महक जाये, 
मुझसे मिलना गुलाब हो जाना,
तुम ही पहला गुनाह होना और,
पहला पहला सबाब हो जाना,
मेरे मैकश की प्यास की खातिर,
मेरी आँखों शराब हो जाना,
जब भी आएंगे वस्ल के लम्हे,
शब तू मेरा हिज़ाब हो जाना !!अनुश्री!

Friday, 31 October 2014

इंतजार मत करना

'हमारी'
जद में नहीं था,'तुम्हारा' रोक लेना,
और मेरा, रुक जाना
'तुम' रूह में हो,
'तुम' ख्वाबों में,
तुम्हारी ही खुशबू है,
मन के गुलाबों में,
लेकिन
दरम्यां फासले बहुत हैं,
कुछ जाने से,
कुछ अनजाने से,
'सुनो'
इंतजार मत करना,
मेरा 'लौटना'
मुमकिन न हो 'शायद' !!अनुश्री!!

प्रेमिका

मुझमे,
नहीं है,
इक अदद
प्रेमिका के गुण,
नहीं आता मुझे,
प्रेम निभाने का शऊर,
'तुम्हारे'
सवालों के जवाब में,
ओढ़ लेती हूँ,
'एक'
गहन चुप्पी,
नहीं जान पाती,
तुम्हारी
आँखों के,
अनकहे अनुबन्ध,
तुम्हें ले कर,
स्वतः ही गढ़ लेती हूँ,
हज़ारों कहानियाँ,
कभी बता नहीं पायी तुम्हें,
मुझे भी पसन्द है,
तुम्हारे साथ,
आकाश के तारे गिनना,
नदी की धारा के,
संग संग बहना,
'हाँ',
तुम्हारी धड़कनों पर
लिखी इबारत,
नहीं पढ़ पाती मैं,
नहीं समझ पाती,
'कब' 'क्या'
कहना चाहते हो तुम,
'शायद'
मुझमे,
नहीं है,
इक अदद
प्रेमिका के गुण.. !!अनुश्री!!



Saturday, 20 September 2014

चाँद

चाँद,
'तुम' यूँ मुस्कुराते हुए,
जब रात की देहरी पर
लिख देते हो 'प्रेम'
मैं मोहित हो जाती हूँ,
भूल जाती हूँ
अपनी 'परिधि'
तुम हो जाते हो 'सर्वस्व',
लेकिन तुम्हे चाह लेना
ही तो 'जिंदगी' नहीं न,
तुम 'आकर्षण' हो,
'दुनिया' नहीं न,
'सुनो'
तुम बार - बार
मत लिखा करो
'प्रेम'
!!अनुश्री!!


Monday, 15 September 2014

सुख दुःख,

दुनिया रस्ता टेढ़ा मेढ़ा, जीवन बहता पानी है, 
मंजिल पर पंहुचा है वो, जिसने हार न मानी है, 

सुख दुःख, दुःख सुख की बातों पर, देखो दुनिया है मौन धरे, 
जीवन में गर दुःख न हो तो, ख़ुशी की इज्जत कौन करे, 
हर घर और आँगन की, यही एक कहानी है। 
मंजिल पर पंहुचा है वो, जिसने हार न मानी है, 

गर स्त्री बन आयी हो तो, इसका तुम अभिमान करो, 
कुछ भूलो तो भूलो लेकिन, इतना हरदम ध्यान करो, 
रानी लक्ष्मी बाई की गाथा, रखना याद जुबानी है। 
मंजिल पर पंहुचा है वो, जिसने हार न मानी है, 

बाधाओं से डर कर रुकना, है जीवन का नाम नहीं, 
तूफानों के आगे झुकना, इंसां तेरा काम नहीं, 
हर मुश्किल को पार करे वो, क़दमों में जिसके रवानी है। 
मंजिल पर पंहुचा है वो, जिसने हार न मानी है,

गंगा

गंगा तेरी बहती धारा
जाने कितनो का तू सहारा

तू जीवन,तू मोक्षदायिनी,
तू निर्मल, तू पतितपावनी
जीवन तो है चलते जाना
जीवन का है तू ही किनारा
गंगा तेरी बहती धारा

तेरी छत्रछाया में बहते
जाने कितने जीवन पलते
तू रोजी रोटी कितनो की
कितनों का संसार सारा
गंगा तेरी बहती धारा

तेरे जल ने जो घुल जाये
उसका मन पावन हो जाये
तू ही मन के मेल मिटाती
तुझसे ही उद्धार हमारा ||
गंगा तेरी बहती धारा 

Friday, 1 August 2014

'प्रेम' 'संवेदना'

एक दिन
बो दी थी
संवेदना 'तुम्हारे'
नाम के साथ,
और
पनप उठा था प्रेम,
खिले थे फूल,
महक रही थी हवाएँ,
वो मादक हँसी लहरों की,
बरसे थे बादल
भींगा था 'मन'
इस पौधे को
साल -दर -साल
बढ़ने के लिए
चाहिए था,
तुम्हारा 'प्रेम'
तुम्हारा 'साथ'
तुम्हारी 'संवेदना'
इतना तो जानते हो न
कोई भी पौधा
बिना खाद पानी के
मुरझा जाता है,
कदाचित
इसकी किस्मत में
भी यही लिखा था,
मुरझा गया 'प्रेम'
सूख गयी 'संवेदना'
बचा रह गया 'ठूँठ'
'अब'
मुझमें नहीं पनपता 'प्रेम'
नहीं जन्मती 'संवेदना' !!अनुश्री!!  

साथ

उन दिनों जब सबसे ज्यादा जरूरत थी मुझे तुम्हारी तुमने ये कहते हुए हाथ छोड़ दिया कि तुम एक कुशल तैराक हो डूबना तुम्हारी फितरत में नहीं, का...