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Wednesday, 8 April 2015

'तुम्हारे लिए'

'तुम'
अलग नही हुए कभी
स्मृतियों से,
जाने मन के किस कोने में
पैठ बना ली है तुमने,
यदा - कदा छा ही जाते हो
जेहन पर,
आज आँगन में फिर खिले हैं,
गुलाब
अरे बाबा ! मुझे याद है,
तुम्हें नहीं पसंद
ये फूलों का लेना देना,
ये दिखावे,
सुनो न,
फिर मिलते हैं वहीं,
दिल की जमीन पर,
जहाँ अब भी रहता है 'प्रेम'
'तुम्हारे लिए' !!अनुश्री!!


'तुम'
अलग नही हुए
स्मृतियों से कभी,
जाने मन के किस कोने में
पैठ बना ली है तुमने,
यदा - कदा छा ही जाते हो
जेहन पर,
आज दिल की जमीन पर,
फिर खिले हैं, गुलाब
जहाँ  रहता है 'प्रेम'
'तुम्हारे लिए'.... !!अनुश्री!!

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