Saturday, 10 November 2018

लड़कियाँ

कुछ लड़कियाँ
ज़िन्दा रहती हैं,
ज़ख़्म और आँसू
साथ ले कर,
उनके हाथों में,
प्रेम की लकीरें नहीं होतीं,
उन्हें नसीब नहीं होता
चाहत, खुशी, उम्मीद,
वो सिर्फ़ छले जाने
के लिए होती हैं,
उन्हें छला जाता है
एक बार, दो बार
कई-कई बार,
इतनी बार कि उन्हें
नफरत हो जाती है
प्रेम से,
और फिर उन्हें
रोज़ ही
होने लगता है
प्रेम......!!अनुश्री!!

Monday, 3 September 2018

मुक्त

जितना आसान होता है,
ये कह देना कि
जाओ मुक्त किया तुम्हें,
उतना ही मुश्किल होता है,
साल - दर - साल साथ
निभाये गये लम्हों से मुक्त होना,
मुक्त होना उस एहसास से,
जहाँ दुनिया तुमसे शुरू होकर
तुमपर ही खत्म हो जाती है,
जहाँ सपने
तुम्हारे सपनों से मिलकर ही,
आकार लेते हैं,
तुम्हारे मुस्कुरा भर देने से,
खिल उठते हैं,
दिन, दोपहर, शाम,
तुम्हारा होना ही होता है,
जिन्दगी का होना,
'सच'
कितना आसान होता है ये कह देना,
जाओ मुक्त किया तुम्हें ... !!अनुश्री!!

तुम्हारी मीरा


Monday, 25 June 2018

स्त्री के मन की थाह

एक स्त्री के मन की
थाह लेना,
ब्रह्मा के वश में भी नहीं,
तुम तो मात्र मनुष्य हो,
तुमने सोच भी कैसे लिया
कि जिस चक्रव्यूह को
ब्रह्मा भी नहीं भेद सके,
उसे भेदने का सामर्थ्य तुममे होगा,
तुम्हें क्या लगा,
तुम स्नेह और प्रेम का
आवरण ओढ़ कर आओगे
तो उसे अपने छले जाने का एहसास नहीं होगा,
तुम ग़लत हो पुरुष,
एकदम ग़लत,
उसे पता होता है ख़ुद के छले जाने का,
लेकिन वो जिसे प्रेम करती है न,
उसके लिए खुद को बिखेरने में भी
संकोच नहीं करती,
वो छली भी जाती है तो उसकी अपनी मर्ज़ी से,
न कि तुम्हारे चाह लेने से,
उसे पता होता है प्रेम के उस पार पीड़ा है,
गहन अन्धकार है,
फिर भी वो तुम्हारी चंद दिनों की ख़ुशी के लिए
उम्र भर के लिए उस पीड़ा और अन्धकार का वरन करती है,
तुम नहीं समझ सकते,
प्रेम में छले जाने का सुख,
किसी के लिए खुद को
बिखेर देने का सुख,
किसी के नाम की माला फेरते - फेरते
जोगन बन जाने का सुख,
किसी के इश्क़ में फ़ना हो जाने का सुख ..... !!अनुश्री!!

Thursday, 21 December 2017

तुमने कहा

तुमने कहा -
खुद को मेरी नज़र से देखो,
दुनिया का सबसे खूबसूरत चेहरा हो तुम।
"उसने मान लिया।"
तुमने कहा -
तुम्हारी आँखें हमेशा कुछ बोलती हैं मुझसे,
या यूँ कहूँ, बोलती सी हैं तुम्हारी आँखें।
"उसने मान लिया।"
तुमने कहा -
तुम्हारी आवाज़ कलेजा चीर कर
रूह तक जा पहुँचती है।
"उसने मान लिया।"
तुमने कहा -
जब तुम्हारे साथ होता हूँ,
खुद के साथ नहीं होता।
"उसने मान लिया।"
फिर तुमने कहा -
आज बात नहीं हो पायेगी,
व्यस्त हूँ बहुत।
"उसने मान लिया।"
तुमने कहा -
तुम्हें नहीं लगता,
तुम्हें खुद को थोड़ा इम्प्रूव करना चाहिये।
"उसने मान लिया।"
तुमने कहा -
आज वहाँ नहीं मिलते,
लोग जानते हैं मुझे, बदनामी होगी।
"उसने मान लिया।"
अंत में तुमने कहा -
सुनो, मुझे बढ़ना है आगे,
बुनना है एक नया सपना,
रचनी है एक नयीं दुनिया।
"उसने, ये भी मान लिया।" ..... !!अनुश्री!!

साथ

उन दिनों जब सबसे ज्यादा जरूरत थी मुझे तुम्हारी तुमने ये कहते हुए हाथ छोड़ दिया कि तुम एक कुशल तैराक हो डूबना तुम्हारी फितरत में नहीं, का...