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Friday, 22 January 2016

प्रेम


मैं तब तक
तुम्हारे साथ हूँ 
तुम जब तक मेरे साथ खड़े हो
जिस दिन मुड़ जाओगे न 
मुड़ जाऊँगी मैं भी
तुम्हारे पीछे नहीं आऊँगी
आवाज़ नहीं दूँगी
रोकूंगी भी नहीं
कोई शिकवा
कोई शिकायत नहीं
ओढ़ लूंगी चुप
नहीं मांगूंगी तुमसे
अपने प्यार का हक
अच्छे से जानती हूँ
प्रेम खैरात में नहीं
सौगात में मिलता है !!अनुश्री!!



मेरे 'तुम'
तुमने भर दिया 
मन का खालीपन
बिखेर दी हैं खुशियाँ
'हाँ' तुम चाँद
मैं धरा
साथ हमारा
अनंतकाल तक .



कर सको तो इतना करना
अपने यकीं के सूरज 
को अस्त मत होने देना
सींचते रहना 
अपने स्नेह से हमारी
'प्रेमबेल'
हाँ, जीवन हो
स्वामी 'तुम'..



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