उसका
नामकरण हुआ था आज,
'बलात्कार पीड़िता'
हाँ, यही नाम रखा गया था,
टीवी वाले, अखबार वाले,
सब आगे पीछे लगे थे,
इंटरव्यू जो लेना था उसका,
घरवालों ने सबकी नजरों से बचा कर
पीछे के कमरे में कैद कर दिया उसे,
सबकी नजरों में एक ही सवाल,
"क्या होगा तेरा?"
हालाँकि उसे नामंजूर था ये नाम,
वो इस हादसे को,
किसी जख्म की तरह,
अपने जिस्म से चस्पा कर
नहीं जीना चाहती थी,
वो चाहती थी जोरों से,
अट्ठहास करना,
अपने केश खोल कर,
लेना एक प्रतिज्ञा ,
कि 'ये केश उन वहशियों के
रक्त से धुलने के बाद ही,
बाँधूँगी'
आह !! द्रौपदी,
एक बार, सिर्फ एक बार,
फिर से लौट आओ,
सौंप दो उसे,
अपने चेहरे का तेज,
अपना साहस,
अपनी आँखों की ज्वाला,
अपनी जिव्हा के विष बाण,
लौट आओ द्रौपदी, लौट आओ... !!अनुश्री!!
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Wednesday, 13 January 2016
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