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Friday, 16 August 2013

सपना

बरसों से 
उसकी आँखों में 
एक
सपना कैद था, 
उसी सपने के साथ 
वो अपना अतीत 
जी चुकी थी, 
वर्तमान जी रही थी 
और 
उसी के साथ उसने 
भविष्य के सपने भी 
बुन रखे थे,
आज अचानक
उसकी आँखे खुली
और
वो सपना उसकी कैद
से रिहा हो गया,
वो ठगी सी अपलक
देखती रह गयी.
बरसों से सहेजे सपने का
दूर जाना उसे भा नहीं
रहा था शायद। .!!अनु !!

2 comments:

  1. भावो को संजोये रचना......

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  2. सपने ऐसे ही उड़ जाते हैं ... पर उन्हें पूरा करने का साहस हो तो वापस जरूर आते हैं ... भावमय ...

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