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Saturday, 20 September 2014

चाँद

चाँद,
'तुम' यूँ मुस्कुराते हुए,
जब रात की देहरी पर
लिख देते हो 'प्रेम'
मैं मोहित हो जाती हूँ,
भूल जाती हूँ
अपनी 'परिधि'
तुम हो जाते हो 'सर्वस्व',
लेकिन तुम्हे चाह लेना
ही तो 'जिंदगी' नहीं न,
तुम 'आकर्षण' हो,
'दुनिया' नहीं न,
'सुनो'
तुम बार - बार
मत लिखा करो
'प्रेम'
!!अनुश्री!!


Monday, 15 September 2014

सुख दुःख,

दुनिया रस्ता टेढ़ा मेढ़ा, जीवन बहता पानी है, 
मंजिल पर पंहुचा है वो, जिसने हार न मानी है, 

सुख दुःख, दुःख सुख की बातों पर, देखो दुनिया है मौन धरे, 
जीवन में गर दुःख न हो तो, ख़ुशी की इज्जत कौन करे, 
हर घर और आँगन की, यही एक कहानी है। 
मंजिल पर पंहुचा है वो, जिसने हार न मानी है, 

गर स्त्री बन आयी हो तो, इसका तुम अभिमान करो, 
कुछ भूलो तो भूलो लेकिन, इतना हरदम ध्यान करो, 
रानी लक्ष्मी बाई की गाथा, रखना याद जुबानी है। 
मंजिल पर पंहुचा है वो, जिसने हार न मानी है, 

बाधाओं से डर कर रुकना, है जीवन का नाम नहीं, 
तूफानों के आगे झुकना, इंसां तेरा काम नहीं, 
हर मुश्किल को पार करे वो, क़दमों में जिसके रवानी है। 
मंजिल पर पंहुचा है वो, जिसने हार न मानी है,

गंगा

गंगा तेरी बहती धारा
जाने कितनो का तू सहारा

तू जीवन,तू मोक्षदायिनी,
तू निर्मल, तू पतितपावनी
जीवन तो है चलते जाना
जीवन का है तू ही किनारा
गंगा तेरी बहती धारा

तेरी छत्रछाया में बहते
जाने कितने जीवन पलते
तू रोजी रोटी कितनो की
कितनों का संसार सारा
गंगा तेरी बहती धारा

तेरे जल ने जो घुल जाये
उसका मन पावन हो जाये
तू ही मन के मेल मिटाती
तुझसे ही उद्धार हमारा ||
गंगा तेरी बहती धारा