पर्यावरण

हर पल अमृत समझ हवा में जहर घोलता है,
आज का इंसान बर्बादी की राह खोलता है,

पेड़ से मिलती शुद्ध हवा, और पेड़ से मिलती सांस,
पेड़ बने  जंगल के कपडे,  चिड़ियों का रानीवास,
पेड़ काट कर पत्थर के जो जंगल बोता है,
आज का इंसान ---

कूड़ा करकट नदियों में, मैला करता है पानी,
उद्योगों के कचरों ने की, घाट घाट मनमानी,
शुद्ध नदी में अपने पापी कर्म घोलता है,
आज का इंसान ---

धरती डावांडोल, छेद अम्बर तक में कर डाला ,
रोज रोज परमाणु परिक्षण, की पहने जयमाला,
विज्ञानी बनकर अज्ञानी राग छेड़ता है,
आज का इंसान ---

गर अब भी न सुधरे तो, परिणाम भयानक होगा,
फिर समाधि टूटेगी, शिव का क्रोध अचानक होगा,
क्यूँ न अपने हित की बातें स्वयं सोचता है,
आज का इंसान ---

Comments

  1. आज का इन्सान जो न करे वो कम है ... ओर अभी तो बहुत कुछ है बरबाद करने को ...

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