तुम्हारी कलाई पर
मौली बाँध,
बाँध आना था,
तुम्हारी सारी मुश्किलें,
सारी
बुरी नजरों की कालिख,
जटाधारी के समक्ष
शीश नवाते वक़्त,
आशीष में
तुम्हारे लिए माँग लेना चाहिए था,
इंद्रधनुषी रंग,
नदिया की बहती जलधारा में
बहा देनी थी सारी पीड़ा,
सारे क्लेश,
उन तमाम पत्थरों के बीच,
बना देनी थी,
तुम्हारे राह के
पत्थरों की समाधि
काश कि
लौटा लाती तुम तक,
तुम्हारे बीते हुए दिन,
जिन्दगी... !!अनुश्री!!
मौली बाँध,
बाँध आना था,
तुम्हारी सारी मुश्किलें,
सारी
बुरी नजरों की कालिख,
जटाधारी के समक्ष
शीश नवाते वक़्त,
आशीष में
तुम्हारे लिए माँग लेना चाहिए था,
इंद्रधनुषी रंग,
नदिया की बहती जलधारा में
बहा देनी थी सारी पीड़ा,
सारे क्लेश,
उन तमाम पत्थरों के बीच,
बना देनी थी,
तुम्हारे राह के
पत्थरों की समाधि
काश कि
लौटा लाती तुम तक,
तुम्हारे बीते हुए दिन,
जिन्दगी... !!अनुश्री!!