उन दिनों
जब तुमने
ख़ुद के रखे हुये नाम की बजाय
पुकारना आरंभ किया था मुझे
मेरे नाम से,
उन दिनों जब तुम
बारहा जताने लगे थे प्रेम
उन्हीं दिनों समझ जाना चाहिये था मुझे,
प्रेम पार कर चुका है
अपने उफ़ान की हद,
और अब आदतन
उतार पर है वो..!!अनुश्री!!
Thursday, 19 August 2021
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साथ
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जिन दिनों उन्हें पढ़ना चाहिये था, ककहरा, सपने, बचपन उन्हें पढ़ाया जा रहा था, देह, बिस्तर, ग्राहक..... !!अनुश्री!!
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