Sunday, 28 April 2013

गीत

जब भी गाया, तुमको गाया, तुम बिन मेरे गीत अधूरे,
तुमको ही बस ढूंढ़ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे ...


तुम पर ही थी लिखी कविता, तुम पर ही थे छंद लिखे,
तेरे किस्से, तेरी बातें, तेरी सुधियों के गंध लिखे ..

तुमको ही अपने जीवन के, नस नस में बहता ज्वार कहा,
मेरे मन की सीपी में, तुम ही थे पहला प्यार कहा ,

एकाकी मन के आँगन में, बरसो बन कर मेघ घनेरे ...
तुमको ही बस ढूंढ़ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे ... 


तुम इन्ही पुरानी राहों के, राही हो कैसे भूल गए,
आँखों से आँखों में गढ़ना, सपन सुहाने भूल गए ...

वो पल जो तुम संग बीत गए, वो पल मेरे मधुमास प्रिय,
ये पल जो तुम बिन बीत रहे, ये पल मेरे वनवास प्रिय ..


मैं मीरा सी प्रेम दीवानी, तुम हृदय बसे घनश्याम मेरे,
तुमको ही बस ढूंढ़ रहा मन, तुम बिन मेरे सपने कोरे ... 

Tuesday, 23 April 2013

नदिया



सुनो, सुनाऊं, तुमको मैं इक, मोहक प्रेम कहानी, 

सागर से मिलने की खातिर, नदिया हुई दीवानी ...


कल कल करती, जरा न डरती, झटपट दौड़ी जाती, 

कितने ही अरमान लिए वो, सरपट दौड़ी जाती, 
नई डगर है, नया सफ़र है, फिर भी चल पड़ी है, 
तटबंधों को साथ लिए वो धुन में निकल पड़ी है, 
पर्वत ने पथ रोका  लेकिन  , उसने हार न मानी।। 
सागर से मिलने ...... 

मटक मटक कर, लचक लचक कर, इठलाती, बलखाती, 

बहती जाये नदिया रानी, गाती गुनगुनाती, 
हवा ने रोका,  गगन ने टोका, क्यूँ  तुम  जिद पे  अड़ी हो, 
सागर से मिलने की धुन में, हमको भूल चली हो, 
बात न उसने मानी किसी की, करनी थी मनमानी ... 
 सागर से मिलने ......

सागर की लहरों ने पूछा, हम से क्या पाओगी, 
मिट जायेगा नाम तुम्हारा, खारी हो जाओगी,
नदिया बोली तुम क्या जानो, प्रेम लगन क्या होती है, 
खुद को खो कर प्रिय को पाना, अन्तिम मंजिल होती है।। 
जरा न बदली चाल नदी की, बदली नहीं रवानी .... 
सागर से मिलने .........


लहरों ने दिवार बनाई, नदिया के रुक जाने को, 

नदिया ने भी जोर लगाया, सागर से मिल जाने को, 
जाकर नदी मिली सागर से, झूम उठा जग सारा, 
जैसे कान्हा की बंशी सुन, नाच उठे ब्रजबाला, 
रस्ता रोक नहीं पायीं, जो लहरें थीं तूफानी। ..
सागर से मिलने ...... 

Tuesday, 16 April 2013

'उसने'





'उसने',
जिंदगी के रेत से,
एक सपना गढ़ा,
उसे आकार दिया,
सजाया,
जब वो सपना
परिपक्व होने को आया,
तो 'अचानक'
वक़्त की आंधी आई
और उड़ा ले गयी ,
उसके सपने ..
और छोड़ गयी
उसकी आँखों में,
फ़कत 'आँसू ' ... !!अनु!!

ग़ज़ल


चेहरा जब आंसूओं से तरबतर होगा,
झील सी आँखों में तब दर्द का बसर होगा ..

नजरें दूर तलक जाके लौट आयेंगी,
धुंध का जिंदगी में जब भी असर होगा ,

जब उठाओगे तलवार बेवफाई की,
सामने देखना मेरा ही झुका सर  होगा,

हर घूँट तेरे नाम का है मंजूर मुझे,
अमृत होगा वो या के जहर होगा,

दर्द के मेले में भी हंसती हो ख़ुशी,
ऐसा कोई तो इस जहान में शहर होगा,

गर लौट भी आये तो क्या होगा 'अनु',
अब  सिन्दूर वो किसी और ही के सर होगा  .. !!अनु!!

Sunday, 14 April 2013

मुक्तक


दिल के किसी कोने में, वो प्यार आज भी है,
सावन की बूंदों में, वही खुमार आज भी है,
'बेशक' जिंदगी तेरे साथ की मुहताज नहीं,
'पर दिल' तेरे एहसासों का तलबगार आज भी है ... !!अनु!!


उठती हर मौज का, साहिल नहीं होता, 
आँखों से क़त्ल करनें वाला, कातिल नहीं होता, 
यक़ीनन, तू रहता है अब भी, दिल में कहीं न कहीं, 
बेवजह तेरे जिक्र से दर्द - ए - दिल नहीं होता !!अनु!!

Wednesday, 10 April 2013

कविता बनती है तब .

न जाने क्यूँ ,
कविता बनती है तब .
जब मन होता है 
टूट कर बिखरा हुआ, 
सोई होती है इच्छाएं, 
अरमान रो रो कर 
हलकान हुए जाते हैं, 
और जब दर्द की अधिकता से 
मन का पोर पोर दुखता है, 
रह रह कर यादों की 
उबासी घेर लेती है,
जिन्दगी भी न, 
दर्द और यादों से अलग 
कुछ भी नहीं, 
कुछ देर को तो 
इधर उधर घुमती है, 
फिर लौट आती है, 
इसी की छत्रछाया में। 
उन यादों से रुदन से 
कभी कभी संगीत की 
स्वरलहरी फूट पड़ती है, 
दर्द में डूबे, 
आँसुओं से सराबोर स्वर, 
जो पिघला देते हैं पहाड़, 
बहा देते हैं दरिया, 
जाने क्यों, 
कविता बनती है तब .. !!ANU!!

Tuesday, 9 April 2013

मुक्तक


शोहरतों पर गुरुर, मत करना,
अपनी नजरों से दूर, मत करना,
प्यार में तेरे, जाँ से जाऊं मैं,
जुल्म ऐसा हुजूर, मत करना .. !!अनु!!

साथ

उन दिनों जब सबसे ज्यादा जरूरत थी मुझे तुम्हारी तुमने ये कहते हुए हाथ छोड़ दिया कि तुम एक कुशल तैराक हो डूबना तुम्हारी फितरत में नहीं, का...