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Thursday, 16 April 2015

तिनका - तिनका

कभी तो कहो, 
कभी तो सुनो, 
'मन'
एक रंग होना चाहता है, 
तेरे ही 
'संग संग'
होना चाहता है !!अनुश्री!!



सच! खुश होने के कितने बहाने हैं, 
आपके, सिर्फ आपके ख्वाब सजाने हैं !!अनुश्री!!


उसने अपनी 'मुस्कान' उतार कर, 
उसे  
ये कहते हुए सौंप दिया 
कि 
'इसे अपने पास महफूज़ रखना, 
दुबारा मुलाकात होने पर
ले लूंगी,
तुम्हारे बगैर ये मेरे
किसी काम की भी नहीं !!अनुश्री!!



प्रेम की इस बहती धारा में तुम भी बहो और हम भी बहे 
एक है पीड़ा एक अगन है तुम भी दहो और हम भी दहे !!अनुश्री!!



मुझको तेरी धुन जो लगी तो मन ये मेरा मलंग हो गया, 
तोड़ के सारे रिश्ते नाते, मतवाला तेरे संग हो गया !!अनुश्री!!



फासले में भी आप हमारे
दिल के करीब हैं
ख्वाहिशों की मत पूछिए,
जो मिला नसीब है,

जिंदगी को जिंदगी की चाह हो गयी,
'इश्क़' तू अजीब है !!अनुश्री!!

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