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Tuesday, 25 November 2014

मुक्तक


(१)
इश्क़ में जब दर्द पाया आँख ये रोती रही,
दिन सिसकता था यहाँ 'औ' रात भी रोती रही,
तुम हुए जो बेवफा तो शब का ये आलम रहा,
चाँद जागा रात भर पर चाँदनी रोती रही !!अनुश्री!!

(२)
याद तेरी इस दिल में दर्द धुन बोती रही,
रात मेरे आँसुओं के बोझ को ढोती रही,
ग़मज़दा मुझे देख कर आसमाँ ने ये कहा,
चाँद जागा रात भर पर चाँदनी रोती रही !!अनुश्री!!


इक चंचल नदिया सी मुझमें अब भी बहती है कहीं, 
खुशियों की इक चादर ओढ़े, सब दुःख सहती है कहीं,
मतलब की दुनिया से छुपकर मेरे दिल में सोई है 
वो लड़की पगली सी मुझमें, अब भी रहती है कहीं, !!अनुश्री!!

तुम्हारे दिल में जो गम हैं, उन्हें मेरा पता देना, 
कभी जो ख्वाब बदलें तो, धीरे से जता देना, 
मेरी चाहत के नग्मों से, 'औ' मेरे दिल के जख्मों से, 
तुम्हे दामन छुड़ाना हो तो फिर आ कर बता देना !!अनुश्री!!

Tuesday, 11 November 2014

Ehsaas

तुम क्या जानो किस पीड़ा से अन्तर्मन गुजरता है, 
कोई डगर हो, कोई दर हो, इक पल भी न ठहरता है, 
तुम फूलों के बीच पले हो, पीर पराई क्या जानो, 
गम की तपती आँच में जलकर ये जीवन पिघलता है !!अनुश्री!!


'प्रेम' 
नहीं है तुमसे, 
'तुम' 
यादों में भी नही, 
याद बस इतना ही है, 
'तुम्हे'
भूलना है,
अपने अंतहीन
सफर से पहले,
जीवन की आखिरी
डगर से पहले !!अनुश्री!!




प्रेम के बादल
देखो आये
घिर घिर के,
'नेह' तेरा गर
मिल जाये,
'ये' जीवन
'जीवन' हो जाये !!अनुश्री!

'इंतजार' मुहब्बत का नसीब है, 
तू दूर सही दिल के करीब है !!अनुश्री!!

'प्रेम' 
नहीं बीतता 
वक़्त के साथ, 
'वक़्त' 
तेज़ी से 
बीत जाता है,
'प्रेम' के साथ !!अनुश्री!!


कर न सको गर वफ़ा सफर में, साथ मेरे तुम चलना मत, 
बेवफाई का नमक कभी, मेरे जख्मों पर मलना मत, 
फिर भी कोई रूप की गागर मन को गर भरमाये तो, 
मुझसे आ कर के धीरे से, कह देना पर छलना मत, !!अनुश्री!!