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Wednesday, 23 July 2014

क्षणिकाएँ

'मन' बंजर 'जमीं' जैसे, 
आँखों में है 'नमीं' जैसे 
'रंग' नहीं है जीवन में, 
तेरी ही हो 'कमी' जैसे !!अनुश्री!!


'प्रेम' 
तुम चले गए, 
'परन्तु' 
वक़्त के 
तेज बहाव के साथ 
तुम्हारा
'प्रेम' नहीं बहा, 
मन के
किसी कोने में, 
स्थिर है कहीं। .!!अनुश्री!!

1 comment:

  1. प्रेम कहीं नहीं जाता बस नाम जाता है ...

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