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Tuesday, 29 April 2014

'प्रेम'

'प्रेम' 
बार बार 
लिखती हूँ तुम्हें 
'ताकि' 
तुम्हारी अनुभूतियाँ 
'यहीं' 
मेरे आस पास 
डोलती रहें, 
तुम महज 
प्रेम नहीं हो, 
'तुम' आत्मा हो,
'तुम' साँस हो,
तुम मेरे जीवन का
एक-एक पल,
मेरी इच्छा,
मेरा मान,
'और'
तुम्हीं तो हो,
'मेरे आराध्य' !!अनुश्री!!

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