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Friday, 25 April 2014

'प्रेम'

'प्रेम' 
तुम्हारा प्रेम 
पारस था, 
और मैं, 
पत्थर, 
तुमने मुझे 
प्रेम कर के 
खरा सोना 
बना दिया, 
सबकी समझ 
से परे है,
'तुम्हारा'
'मुझे' मेरे ही लिए
छोड़ जाना,
उसे या तो
मैं समझती हूँ,
या फिर
सिर्फ तुम !!अनुश्री!!
(प्रेम अनकहे शब्दों का संसार है, जिसे सिर्फ दिल समझता है )

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