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Thursday, 3 April 2014

राजनीति

(1) 

बूँद- बूँद से भरती गागर, 
बूँद बूँद से प्यास मिटे, 
बूँद बूँद से बनता सागर, 
बूँद बूँद से तृप्ति मिले, 
तो अपने वोट की कीमत जानो, 
देश में अपना स्थान पहचानो, 
इक इक वोट से सत्ता बदलती, 
अपने को न दुर्बल जानो, 
नयी कोपलें फूटेंगी और, 
नव युग का निर्माण होगा, 
जन जन की खुशियों से सजकर, 
देश का निर्माण होगा। !!अनुश्री!!

(2)
चंद टुकड़ों पर कुत्तों को झगड़ते देखा, 
एक धमाके में सैकड़ों को मरते देखा, 
सत्ता और राजनीति की आँच ही कुछ ऐसी है, 
अच्छे अच्छों का ईमान पिघलते देखा !!अनुश्री!! 



1 comment:

  1. बहुत खूब ... सार्थक आंकलन है ...

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