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Sunday, 29 September 2013

ऐतबार

'उसे'
जब ऐतबार नहीं था,
तुमने कहा,
बस ऐतबार दे दो,

जब ऐतबार हुआ,
तो तुमने कहा,
बस प्यार दे दो,

जब प्यार हुआ,
तुमने कहा,
बस समर्पण दे दो

'वो' जब समर्पित हुई,
'तुम'
पलायन कर गए .... !!अनुश्री !!

Thursday, 26 September 2013

कहाँ मैं बची तुमसे जुदा।

तुम्हे भूल कर जाये कहाँ,
कहाँ मैं बची तुमसे जुदा।
 

तू ही रात की तन्हाई में,
तू ही दिन के शोरगुल में है,
मेरा जो रहा, तू ही रहा।
कहाँ मैं बची तुमसे जुदा।।

इक मोड़ पर थे तुम मिले,
फिर हौले से था दिल मिला,
अब तू बना, मेरा खुदा
कहाँ मैं बची तुमसे जुदा।।

मेरे साज में तू ही बसा,
मेरे गीत को, मेरे भाव को,
अब तुझसे ही है वास्ता
कहाँ मैं बची तुमसे जुदा। !!अनु!!

Thursday, 12 September 2013

इश्क विश्क

वो इश्क विश्क का दौर था,
वो दौर भी कुछ और था,

दिल में हसरतें तो थी मगर,
दिल अपना ही कहीं और था,

मिला दर्द जब, तो दवा हुई,
वो मर्ज ही कुछ और था,

जब तुम मिले तो सब मिला,
वो सफ़र ही कोई और था। . !!अनु!!

Monday, 9 September 2013

हे गणपति



खोलो नयन, चहुँ ओर निहारो,
हे गणपति अब, भू को पधारो,

अधम, कपट का, बसता बसेरा,
नयनन को नहीं, दिखता सवेरा,
तुम आकर इस क्षण से उबारो,
हे गणपति अब, भू को पधारो,


राम रहीम के द्वेष मिटा दो,
प्रेम के इत उत फूल खिल दो,
इतनी सी मेरी अरज स्वीकारो,
हे गणपति अब, भू को पधारो,

लड़की

वो लड़की,
अपनी कविताओं में,
खुशियों को लिखती,
प्रेम को लिखती,
सपनो को जीती,
उसकी कवितायेँ,
उसके अन्तर्मन का
बिम्ब थीं,
किसी को,
 इश्क हो गया,
'उससे'
उसकी कविताओं से,
इश्क का जुनून बन जाना,
दे जाता है,
दर्द बेहिसाब,
रात की कालिख,
घुल जाती है जिंदगी में,
'अब'
'वो' लड़की,
खुशियाँ, नहीं लिखती,
प्रेम और सपने  नहीं लिखती,
आज कल उसकी कविताओं
का रंग,
रक्तिम हो गया है।   !!अनु!!



Thursday, 5 September 2013

मुकद्दर

मुकद्दर में नहीं था,
जीस्त का शादाब हो जाना,
तुम्हे भुलाने की पुरजोर कोशिश
'और' 
हर बार नाकामी मिलना,
तुम्हारी यादों की
कफ़स से निकलना
आसां नहीं, नामुमकिन है, 
अब बस एक ही आरज़ू,
जिन गुजरगाहों से
तुम गुजरो,
हर सिम्त शुआओं का बसेरा हो,
तीरगी तुम्हे छू कर 
भी न जाए,
तुम हमेशा मेरी दुआओं में
शुमार रहोगे,
मेरी नीमबाज़ आँखों में
तुम्हारे ही ख्वाब पलते रहेंगे,
एक अधूरे फ़साने के
पुरे होने का इंतज़ार
ताउम्र रहेगा।